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“अब तो तेरी यादें भी कुछ धुंधली सी होने लगी है।

वो लम्हे भी जा चुके जिनमे तनहा बैठे याद किया करता था तुझे।
किसी से तेरे बारे में बात किये हुए भी एक अरसा हो चुका।
मगर दिल में ख्याल है, तू कहीं न कहीं से मुझे देख तो ज़रूर रही ही होगी।
मुझे पता है, मेरे लिए मांगी हर दुआ को उस खुदा तक पहुंचाकर, पूरी करवा रही होगी।
और देख आज मुझे, मैं कहाँ आ पहुंचा हूँ।
पर काश तू मेरे साथ होती मेरी माँ , तो शायद इस लम्हे में कोई बात होती।
पर आज इस लम्हे में भी कुछ कमी सी है।

पर अब क्या कहु माँ, अब तो तेरी यादें भी कुछ धुंधली सी होने लगी है।”

Kuldeep Gera
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