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पथ के दावेदार
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शरतचंद्र कि प्रसिद्ध उपन्यास पथ के दावेदार एक कथा से बढ़ कर एक दार्शनिक संभाषण है l लेखक ने कहानी के मुख्य पात्रों के माध्यम से जीवन और समाज के क्या आधार है इस पर चर्चा की है I एक देश जो अपनी स्वतंत्रता के लिए जूझ रहा है उसके अन्दर के विकार का क्या? किसका मूल्य अधिक है - क्रान्ति या प्रेम? जीवन के और रिश्तों के अपने क्या मूल्य हैं? देश की स्वतंत्रता के लिए की क्रांति और उससे होने वाली हिंसा कहाँ तक सही है? कथा के पात्र सव्यसाची में बोस बाबू का स्मरण हो आता है, शायद ये भी एक कारण हो कि इसे अंग्रेज़ी सरकार ने बैन कर दिया था I
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पथ के दावेदार.
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